आप उस बोझ को चुपचाप उठाए चल रहे हैं — कल की चिंता, उन बातों का डर जो आपके हाथ में नहीं हैं। लेकिन सच यह है कि आपका मन इतना सब थामे रखने के लिए नहीं बना। आप इसे नीचे रख सकते हैं। आप सांस ले सकते हैं। परमेश्वर आपको दूर से तड़पते नहीं देख रहा — वह यहीं है, आपकी अगली सांस से भी करीब, हर उस बोझ को उठाने के लिए तैयार जिसे आप अकेले पकड़े हुए हैं।

"किसी भी बात की चिन्ता मत करो; परन्तु हर एक बात में तुम्हारी विनतियाँ प्रार्थना और बिनती के द्वारा धन्यवाद के साथ परमेश्वर के सम्मुख उपस्थित की जाएं। तब परमेश्वर की शान्ति, जो समझ से बिल्कुल परे है, तुम्हारे हृदय और मन को मसीह यीशु में सुरक्षित रखेगी।" — फिलिप्पियों 4:6–7 (HINOVBSI)
आप उस बोझ को चुपचाप उठाए चल रहे हैं — कल की चिंता, उन बातों का डर जो आपके हाथ में नहीं हैं। लेकिन सच यह है कि आपका मन इतना सब थामे रखने के लिए नहीं बना। आप इसे नीचे रख सकते हैं। आप सांस ले सकते हैं। परमेश्वर आपको दूर से तड़पते नहीं देख रहा — वह यहीं है, आपकी अगली सांस से भी करीब, हर उस बोझ को उठाने के लिए तैयार जिसे आप अकेले पकड़े हुए हैं। "किसी भी बात की चिन्ता मत करो; परन्तु हर एक बात में तुम्हारी विनतियाँ प्रार्थना और बिनती के द्वारा धन्यवाद के साथ परमेश्वर के सम्मुख उपस्थित की जाएं। तब परमेश्वर की शान्ति, जो समझ से बिल्कुल परे है, तुम्हारे हृदय और मन को मसीह यीशु में सुरक्षित रखेगी।" — फिलिप्पियों 4:6–7 (HINOVBSI)
0 Комментарии 0 Поделились 45 Просмотры