प्रभु परमेश्वर यीशु मसीह ने अपने शिष्यों को आज्ञा दी कि वे दुनिया की सभी जातियों में जाकर लोगों को उनका शिष्य बनाएँ और उन्हें वह सब मानना ​​सिखाएँ जो उन्होंने सिखाया था। आज्ञा मानने वाले और विश्वास रखने वाले शिष्यों के उस समूह को 'नया नियम कलीसिया' (New Testament Church) कहा जाता है। प्रेरित पौलुस की शहादत के साथ ही बाइबिल-आधारित शिष्यत्व वाली कलीसिया का अस्तित्व समाप्त हो गया, जैसा कि पौलुस को डर था। यीशु की ओर से भेजी गई प्रेरितिक शिक्षा के बिना, पादरियों या पुजारियों द्वारा चलाई जाने वाली कोई भी कलीसिया केवल विधर्मी पंथ (heretic cult group) ही मानी जाएगी।

इफिसियों 2:20-22 में विश्वासियों को एक आध्यात्मिक भवन के रूप में वर्णित किया गया है, जो प्रेरितों और भविष्यद्वक्ताओं की नींव पर एक साथ जुड़े हुए हैं और यीशु मसीह इसके मुख्य कोने का पत्थर (cornerstone) हैं। नींव (पद 20): कलीसिया प्रेरितों और भविष्यद्वक्ताओं की शिक्षा और भूमिका पर टिकी है। कोने का पत्थर (पद 20): यीशु मसीह मुख्य कोने का पत्थर हैं। वह पूरे ढांचे को एक साथ जोड़े रखते हैं और उसे दिशा व सहारा देते हैं। बढ़ता हुआ मंदिर (पद 21): विश्वासी आपस में जुड़े हुए हैं। वे प्रभु को समर्पित एक पवित्र मंदिर के रूप में विकसित होते हैं। परमेश्वर का निवास स्थान (पद 22): परमेश्वर पवित्र आत्मा के माध्यम से इस आध्यात्मिक भवन में निवास करते हैं।

प्रभु परमेश्वर यीशु मसीह अपने दूसरे आगमन से पहले प्रेरितिक शिक्षण सेवा (apostolic teaching ministry) को बहाल करने जा रहे हैं, ताकि वे अपनी कलीसिया को अपने आगमन के लिए तैयार कर सकें।
प्रभु परमेश्वर यीशु मसीह ने अपने शिष्यों को आज्ञा दी कि वे दुनिया की सभी जातियों में जाकर लोगों को उनका शिष्य बनाएँ और उन्हें वह सब मानना ​​सिखाएँ जो उन्होंने सिखाया था। आज्ञा मानने वाले और विश्वास रखने वाले शिष्यों के उस समूह को 'नया नियम कलीसिया' (New Testament Church) कहा जाता है। प्रेरित पौलुस की शहादत के साथ ही बाइबिल-आधारित शिष्यत्व वाली कलीसिया का अस्तित्व समाप्त हो गया, जैसा कि पौलुस को डर था। यीशु की ओर से भेजी गई प्रेरितिक शिक्षा के बिना, पादरियों या पुजारियों द्वारा चलाई जाने वाली कोई भी कलीसिया केवल विधर्मी पंथ (heretic cult group) ही मानी जाएगी। इफिसियों 2:20-22 में विश्वासियों को एक आध्यात्मिक भवन के रूप में वर्णित किया गया है, जो प्रेरितों और भविष्यद्वक्ताओं की नींव पर एक साथ जुड़े हुए हैं और यीशु मसीह इसके मुख्य कोने का पत्थर (cornerstone) हैं। नींव (पद 20): कलीसिया प्रेरितों और भविष्यद्वक्ताओं की शिक्षा और भूमिका पर टिकी है। कोने का पत्थर (पद 20): यीशु मसीह मुख्य कोने का पत्थर हैं। वह पूरे ढांचे को एक साथ जोड़े रखते हैं और उसे दिशा व सहारा देते हैं। बढ़ता हुआ मंदिर (पद 21): विश्वासी आपस में जुड़े हुए हैं। वे प्रभु को समर्पित एक पवित्र मंदिर के रूप में विकसित होते हैं। परमेश्वर का निवास स्थान (पद 22): परमेश्वर पवित्र आत्मा के माध्यम से इस आध्यात्मिक भवन में निवास करते हैं। प्रभु परमेश्वर यीशु मसीह अपने दूसरे आगमन से पहले प्रेरितिक शिक्षण सेवा (apostolic teaching ministry) को बहाल करने जा रहे हैं, ताकि वे अपनी कलीसिया को अपने आगमन के लिए तैयार कर सकें।
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