Matthew 6:33
But seek first kingdom and his righteousness, and all these things will be added to you.
But seek first kingdom and his righteousness, and all these things will be added to you.
- Vive a chakradharpur
- Dal Gua
- Country India
- Ha studiato masters degree alle kokhan university chaibasa
- Female
- Single
- 02/22/2001
- Seguito da 13 people
Aggiornamenti recenti
- परमेश्वर ने अब्राहम और सारा को वृद्धावस्था तक क्यों प्रतीक्षा कराई और तब इसहाक दिया? — वह बाइबिलीय सत्य जिसे बहुत से विश्वासी नहीं समझते
बहुत से विश्वासी यह प्रश्न पूछते हैं:
यदि परमेश्वर ने पहले ही अब्राहम और सारा से इसहाक देने का वादा कर दिया था, तो फिर उन्होंने उन्हें जवान अवस्था में संतान क्यों नहीं दी?
यदि परमेश्वर चाहता था कि इसहाक जन्म ले, तो उसने तब तक प्रतीक्षा क्यों की जब तक अब्राहम और सारा शारीरिक रूप से संतान उत्पन्न करने में असमर्थ नहीं हो गए?
बहुतों को परमेश्वर की यह देरी अनावश्यक प्रतीत होती है। कुछ लोग यह भी सोचते हैं कि शायद परमेश्वर अपना वादा भूल गया था।
लेकिन बाइबल हमें सिखाती है कि परमेश्वर की देरी, उसकी ओर से इनकार नहीं होती। उसकी प्रत्येक प्रतीक्षा के पीछे एक दिव्य उद्देश्य होता है।
परमेश्वर ने सबसे पहले अब्राहम से प्रतिज्ञा की कि वह बहुत-सी जातियों का पिता बनेगा (उत्पत्ति 12:1–3; 15:1–6)। लेकिन वर्ष बीतते गए और कोई संतान नहीं हुई। अब्राहम वृद्ध होता गया और सारा बाँझ ही रही। मनुष्य की दृष्टि से प्रतिज्ञा हर वर्ष और भी असंभव होती गई।
जब अंततः इसहाक का जन्म हुआ, तब अब्राहम 100 वर्ष का और सारा 90 वर्ष की थी (उत्पत्ति 21:1–7)। बाइबल बताती है कि सारा संतान उत्पन्न करने की आयु पार कर चुकी थी।
मानवीय दृष्टि से सब कुछ समाप्त हो चुका था।
लेकिन परमेश्वर के लिए वही सबसे उचित समय था।
इस कहानी का सबसे बड़ा सबक यह है कि परमेश्वर अक्सर तब कार्य करता है जब मनुष्य की सामर्थ पूरी तरह समाप्त हो जाती है, ताकि सारी महिमा केवल उसी को मिले।
यदि इसहाक का जन्म तब होता जब अब्राहम और सारा जवान थे, तो लोग उसे एक सामान्य घटना मान लेते।
परन्तु परमेश्वर ने परिस्थिति को इतना असंभव होने दिया कि कोई भी यह नहीं कह सकता था कि यह केवल प्राकृतिक घटना थी।
इसहाक का जन्म एक स्पष्ट चमत्कार था।
रोमियों 4:19–21 बताता है कि अब्राहम ने अपने शरीर को लगभग मृत समान और सारा के गर्भ को संतान उत्पन्न करने में असमर्थ समझा, फिर भी उसने अविश्वास नहीं किया। इसके बजाय उसका विश्वास और भी दृढ़ हुआ, क्योंकि वह पूरी तरह आश्वस्त था कि परमेश्वर जो प्रतिज्ञा करता है, उसे पूरा करने में भी सामर्थी है।
यह हमें सिखाता है कि प्रतीक्षा के समय में विश्वास बढ़ता है।
परमेश्वर के राज्य में प्रतीक्षा कभी व्यर्थ नहीं होती।
वह अक्सर देरी के समय का उपयोग हमारे विश्वास को गहरा करने, आत्मनिर्भरता को तोड़ने और हमें पूरी तरह उसी पर निर्भर होना सिखाने के लिए करता है।
परमेश्वर ने यह भी दिखाया कि उसकी प्रतिज्ञाएँ हमारी समय-सारिणी के अनुसार नहीं, बल्कि उसके निश्चित समय के अनुसार पूरी होती हैं।
सभोपदेशक 3:11 कहता है:
"उसने हर एक वस्तु को उसके समय पर सुन्दर बनाया है।"
हमारे समय पर नहीं—
उसके समय पर।
बहुत से विश्वासी इसलिए निराश हो जाते हैं क्योंकि वे परमेश्वर के समय की तुलना अपनी अपेक्षाओं से करते हैं।
लेकिन परमेश्वर का समय कभी गलत नहीं होता।
प्रतीक्षा के दौरान अब्राहम और सारा ने एक बड़ी भूल भी की।
उन्होंने परमेश्वर के समय की प्रतीक्षा करने के बजाय अपनी योजना बनाई और हाजिरा के द्वारा इश्माएल को जन्म दिया (उत्पत्ति 16)।
यद्यपि परमेश्वर ने इश्माएल को भी आशीष दी, फिर भी वह प्रतिज्ञा का पुत्र नहीं था।
इससे हमें एक महत्वपूर्ण आत्मिक सिद्धांत मिलता है:
जब हम परमेश्वर की प्रतिज्ञाओं को उसके समय से पहले अपने प्रयासों से पूरा करने की कोशिश करते हैं, तो अक्सर हम अनावश्यक दुख, संघर्ष और लंबे समय तक रहने वाले परिणाम पैदा कर देते हैं।
परमेश्वर को अब्राहम की मानवीय योजना की आवश्यकता नहीं थी।
उसे केवल उसके निरंतर विश्वास की आवश्यकता थी।
इसहाक का जन्म यह भी सिद्ध करता है कि परमेश्वर के लिए कुछ भी असंभव नहीं है।
जब सारा ने वृद्धावस्था में पुत्र होने की बात सुनकर हँसी, तब परमेश्वर ने पूछा:
"क्या यहोवा के लिये कोई बात कठिन है?" (उत्पत्ति 18:14)
यह प्रश्न आज भी हर विश्वासी से पूछा जाता है।
जिस परमेश्वर ने सारा के बाँझ गर्भ को खोल दिया, वही आज भी असंभव को संभव करने वाला परमेश्वर है।
यह प्रतीक्षा अब्राहम की आत्मिक तैयारी भी थी।
वाचा के राष्ट्र का पिता बनने से पहले उसे आज्ञाकारिता, धैर्य, नम्रता और विश्वास में बढ़ना आवश्यक था।
परमेश्वर केवल इसहाक को अब्राहम के लिए तैयार नहीं कर रहा था, बल्कि अब्राहम को भी इसहाक के लिए तैयार कर रहा था।
आज भी हम अक्सर आशीष, सेवा, विवाह, पद या सफलता के लिए प्रार्थना करते हैं, जबकि परमेश्वर पहले हमें उन आशीषों को सही ढंग से संभालने योग्य बना रहा होता है।
यदि परमेश्वर हर प्रार्थना का उत्तर तुरंत दे देता, तो बहुत से लोग ऐसी आशीषें पा लेते जिन्हें सँभालने के लिए वे अभी आत्मिक रूप से तैयार नहीं होते।
इसहाक की कहानी हमें याद दिलाती है कि परमेश्वर की देरी उसकी बुद्धि का प्रमाण है, उपेक्षा का नहीं।
उसकी चुप्पी का अर्थ यह नहीं कि उसने अपना वादा भूल गया है।
जिस परमेश्वर ने सारा को स्मरण किया, वही आज भी अपने प्रत्येक वचन को पूरा करता है।
प्रतीक्षा के समय सबसे बड़ा खतरा अविश्वास है।
और सबसे बड़ी विजय है—परमेश्वर के निश्चित समय तक विश्वासयोग्य बने रहना।
जब अंततः इसहाक का जन्म हुआ, तब सबने स्वीकार किया कि यह केवल परमेश्वर का कार्य था।
यह चमत्कार आने वाली पीढ़ियों के लिए गवाही बन गया।
सीख
परमेश्वर की देरी को उसके इनकार के समान मत समझिए।
उसकी प्रतिज्ञाएँ कभी समाप्त नहीं होतीं।
यदि परमेश्वर ने वचन दिया है, तो वह उसे अवश्य पूरा करेगा।
आपकी प्रतीक्षा लंबी हो सकती है, लेकिन परमेश्वर का समय सदैव सर्वोत्तम होता है।
विश्वास बनाए रखें।
आज्ञाकारी बने रहें।
परमेश्वर पर भरोसा रखें।
जिस परमेश्वर ने अपने निश्चित समय पर इसहाक दिया, वही आज भी अपने वचनों को पूरा करने वाला परमेश्वर है।
अधिक अध्ययन के लिए बाइबल के पद
• उत्पत्ति 12:1–3
• उत्पत्ति 15:1–6
• उत्पत्ति 16
• उत्पत्ति 17:15–21
• उत्पत्ति 18:9–15
• उत्पत्ति 21:1–7
• रोमियों 4:19–21
• इब्रानियों 6:12
• इब्रानियों 11:11–12
• सभोपदेशक 3:11
निष्कर्ष
परमेश्वर ने इसहाक के जन्म में देरी इसलिए नहीं की क्योंकि उसमें सामर्थ की कमी थी या वह अपना वादा भूल गया था। उसने ऐसा इसलिए किया क्योंकि वह एक बड़ा उद्देश्य पूरा कर रहा था—अब्राहम और सारा के विश्वास को दृढ़ करना, उन्हें आत्मिक रूप से तैयार करना, अपनी अलौकिक सामर्थ को प्रकट करना, और यह सिद्ध करना कि सारी महिमा केवल उसी की है।
जब परमेश्वर का निश्चित समय आया, तब असंभव संभव हो गया।
आज भी विश्वासी विश्वास रख सकते हैं कि परमेश्वर की देरी कभी व्यर्थ नहीं होती। वह तब भी कार्य कर रहा होता है जब हम उसकी कार्यप्रणाली को नहीं देख पाते।
यदि इस शिक्षा ने आपको आशीष दी है, तो इसे दूसरों के साथ साझा करें, भविष्य में अध्ययन के लिए सुरक्षित रखें, और परमेश्वर के वचन पर आधारित ऐसी और शिक्षाओं के लिए हमारे पेज को फॉलो करें।परमेश्वर ने अब्राहम और सारा को वृद्धावस्था तक क्यों प्रतीक्षा कराई और तब इसहाक दिया? — वह बाइबिलीय सत्य जिसे बहुत से विश्वासी नहीं समझते बहुत से विश्वासी यह प्रश्न पूछते हैं: यदि परमेश्वर ने पहले ही अब्राहम और सारा से इसहाक देने का वादा कर दिया था, तो फिर उन्होंने उन्हें जवान अवस्था में संतान क्यों नहीं दी? यदि परमेश्वर चाहता था कि इसहाक जन्म ले, तो उसने तब तक प्रतीक्षा क्यों की जब तक अब्राहम और सारा शारीरिक रूप से संतान उत्पन्न करने में असमर्थ नहीं हो गए? बहुतों को परमेश्वर की यह देरी अनावश्यक प्रतीत होती है। कुछ लोग यह भी सोचते हैं कि शायद परमेश्वर अपना वादा भूल गया था। लेकिन बाइबल हमें सिखाती है कि परमेश्वर की देरी, उसकी ओर से इनकार नहीं होती। उसकी प्रत्येक प्रतीक्षा के पीछे एक दिव्य उद्देश्य होता है। परमेश्वर ने सबसे पहले अब्राहम से प्रतिज्ञा की कि वह बहुत-सी जातियों का पिता बनेगा (उत्पत्ति 12:1–3; 15:1–6)। लेकिन वर्ष बीतते गए और कोई संतान नहीं हुई। अब्राहम वृद्ध होता गया और सारा बाँझ ही रही। मनुष्य की दृष्टि से प्रतिज्ञा हर वर्ष और भी असंभव होती गई। जब अंततः इसहाक का जन्म हुआ, तब अब्राहम 100 वर्ष का और सारा 90 वर्ष की थी (उत्पत्ति 21:1–7)। बाइबल बताती है कि सारा संतान उत्पन्न करने की आयु पार कर चुकी थी। मानवीय दृष्टि से सब कुछ समाप्त हो चुका था। लेकिन परमेश्वर के लिए वही सबसे उचित समय था। इस कहानी का सबसे बड़ा सबक यह है कि परमेश्वर अक्सर तब कार्य करता है जब मनुष्य की सामर्थ पूरी तरह समाप्त हो जाती है, ताकि सारी महिमा केवल उसी को मिले। यदि इसहाक का जन्म तब होता जब अब्राहम और सारा जवान थे, तो लोग उसे एक सामान्य घटना मान लेते। परन्तु परमेश्वर ने परिस्थिति को इतना असंभव होने दिया कि कोई भी यह नहीं कह सकता था कि यह केवल प्राकृतिक घटना थी। इसहाक का जन्म एक स्पष्ट चमत्कार था। रोमियों 4:19–21 बताता है कि अब्राहम ने अपने शरीर को लगभग मृत समान और सारा के गर्भ को संतान उत्पन्न करने में असमर्थ समझा, फिर भी उसने अविश्वास नहीं किया। इसके बजाय उसका विश्वास और भी दृढ़ हुआ, क्योंकि वह पूरी तरह आश्वस्त था कि परमेश्वर जो प्रतिज्ञा करता है, उसे पूरा करने में भी सामर्थी है। यह हमें सिखाता है कि प्रतीक्षा के समय में विश्वास बढ़ता है। परमेश्वर के राज्य में प्रतीक्षा कभी व्यर्थ नहीं होती। वह अक्सर देरी के समय का उपयोग हमारे विश्वास को गहरा करने, आत्मनिर्भरता को तोड़ने और हमें पूरी तरह उसी पर निर्भर होना सिखाने के लिए करता है। परमेश्वर ने यह भी दिखाया कि उसकी प्रतिज्ञाएँ हमारी समय-सारिणी के अनुसार नहीं, बल्कि उसके निश्चित समय के अनुसार पूरी होती हैं। सभोपदेशक 3:11 कहता है: "उसने हर एक वस्तु को उसके समय पर सुन्दर बनाया है।" हमारे समय पर नहीं— उसके समय पर। बहुत से विश्वासी इसलिए निराश हो जाते हैं क्योंकि वे परमेश्वर के समय की तुलना अपनी अपेक्षाओं से करते हैं। लेकिन परमेश्वर का समय कभी गलत नहीं होता। प्रतीक्षा के दौरान अब्राहम और सारा ने एक बड़ी भूल भी की। उन्होंने परमेश्वर के समय की प्रतीक्षा करने के बजाय अपनी योजना बनाई और हाजिरा के द्वारा इश्माएल को जन्म दिया (उत्पत्ति 16)। यद्यपि परमेश्वर ने इश्माएल को भी आशीष दी, फिर भी वह प्रतिज्ञा का पुत्र नहीं था। इससे हमें एक महत्वपूर्ण आत्मिक सिद्धांत मिलता है: जब हम परमेश्वर की प्रतिज्ञाओं को उसके समय से पहले अपने प्रयासों से पूरा करने की कोशिश करते हैं, तो अक्सर हम अनावश्यक दुख, संघर्ष और लंबे समय तक रहने वाले परिणाम पैदा कर देते हैं। परमेश्वर को अब्राहम की मानवीय योजना की आवश्यकता नहीं थी। उसे केवल उसके निरंतर विश्वास की आवश्यकता थी। इसहाक का जन्म यह भी सिद्ध करता है कि परमेश्वर के लिए कुछ भी असंभव नहीं है। जब सारा ने वृद्धावस्था में पुत्र होने की बात सुनकर हँसी, तब परमेश्वर ने पूछा: "क्या यहोवा के लिये कोई बात कठिन है?" (उत्पत्ति 18:14) यह प्रश्न आज भी हर विश्वासी से पूछा जाता है। जिस परमेश्वर ने सारा के बाँझ गर्भ को खोल दिया, वही आज भी असंभव को संभव करने वाला परमेश्वर है। यह प्रतीक्षा अब्राहम की आत्मिक तैयारी भी थी। वाचा के राष्ट्र का पिता बनने से पहले उसे आज्ञाकारिता, धैर्य, नम्रता और विश्वास में बढ़ना आवश्यक था। परमेश्वर केवल इसहाक को अब्राहम के लिए तैयार नहीं कर रहा था, बल्कि अब्राहम को भी इसहाक के लिए तैयार कर रहा था। आज भी हम अक्सर आशीष, सेवा, विवाह, पद या सफलता के लिए प्रार्थना करते हैं, जबकि परमेश्वर पहले हमें उन आशीषों को सही ढंग से संभालने योग्य बना रहा होता है। यदि परमेश्वर हर प्रार्थना का उत्तर तुरंत दे देता, तो बहुत से लोग ऐसी आशीषें पा लेते जिन्हें सँभालने के लिए वे अभी आत्मिक रूप से तैयार नहीं होते। इसहाक की कहानी हमें याद दिलाती है कि परमेश्वर की देरी उसकी बुद्धि का प्रमाण है, उपेक्षा का नहीं। उसकी चुप्पी का अर्थ यह नहीं कि उसने अपना वादा भूल गया है। जिस परमेश्वर ने सारा को स्मरण किया, वही आज भी अपने प्रत्येक वचन को पूरा करता है। प्रतीक्षा के समय सबसे बड़ा खतरा अविश्वास है। और सबसे बड़ी विजय है—परमेश्वर के निश्चित समय तक विश्वासयोग्य बने रहना। जब अंततः इसहाक का जन्म हुआ, तब सबने स्वीकार किया कि यह केवल परमेश्वर का कार्य था। यह चमत्कार आने वाली पीढ़ियों के लिए गवाही बन गया। सीख परमेश्वर की देरी को उसके इनकार के समान मत समझिए। उसकी प्रतिज्ञाएँ कभी समाप्त नहीं होतीं। यदि परमेश्वर ने वचन दिया है, तो वह उसे अवश्य पूरा करेगा। आपकी प्रतीक्षा लंबी हो सकती है, लेकिन परमेश्वर का समय सदैव सर्वोत्तम होता है। विश्वास बनाए रखें। आज्ञाकारी बने रहें। परमेश्वर पर भरोसा रखें। जिस परमेश्वर ने अपने निश्चित समय पर इसहाक दिया, वही आज भी अपने वचनों को पूरा करने वाला परमेश्वर है। अधिक अध्ययन के लिए बाइबल के पद • उत्पत्ति 12:1–3 • उत्पत्ति 15:1–6 • उत्पत्ति 16 • उत्पत्ति 17:15–21 • उत्पत्ति 18:9–15 • उत्पत्ति 21:1–7 • रोमियों 4:19–21 • इब्रानियों 6:12 • इब्रानियों 11:11–12 • सभोपदेशक 3:11 निष्कर्ष परमेश्वर ने इसहाक के जन्म में देरी इसलिए नहीं की क्योंकि उसमें सामर्थ की कमी थी या वह अपना वादा भूल गया था। उसने ऐसा इसलिए किया क्योंकि वह एक बड़ा उद्देश्य पूरा कर रहा था—अब्राहम और सारा के विश्वास को दृढ़ करना, उन्हें आत्मिक रूप से तैयार करना, अपनी अलौकिक सामर्थ को प्रकट करना, और यह सिद्ध करना कि सारी महिमा केवल उसी की है। जब परमेश्वर का निश्चित समय आया, तब असंभव संभव हो गया। आज भी विश्वासी विश्वास रख सकते हैं कि परमेश्वर की देरी कभी व्यर्थ नहीं होती। वह तब भी कार्य कर रहा होता है जब हम उसकी कार्यप्रणाली को नहीं देख पाते। यदि इस शिक्षा ने आपको आशीष दी है, तो इसे दूसरों के साथ साझा करें, भविष्य में अध्ययन के लिए सुरक्षित रखें, और परमेश्वर के वचन पर आधारित ऐसी और शिक्षाओं के लिए हमारे पेज को फॉलो करें।0 Commenti 0 condivisioni 8 Views1
Effettua l'accesso per mettere mi piace, condividere e commentare! -
-
- "When He had called the people to Himself, with His disciples also, He said to them, Whoever desires to come after Me, let him deny himself, and take up his cross, and follow Me."
Mark 8:34 ( NKJV)
*DAILY VERSE*
Check it out!:
Shared from https://lordsbook.com
download the app on
IOS
https://apps.apple.com/ug/app/lordsbook-app/id6670486435
ANDROID
https://play.google.com/store/apps/details?id=com.himfirstapps.lordsbookapp"When He had called the people to Himself, with His disciples also, He said to them, Whoever desires to come after Me, let him deny himself, and take up his cross, and follow Me." Mark 8:34 ( NKJV) *DAILY VERSE* Check it out!: Shared from https://lordsbook.com download the app on IOS https://apps.apple.com/ug/app/lordsbook-app/id6670486435 ANDROID https://play.google.com/store/apps/details?id=com.himfirstapps.lordsbookapp0 Commenti 0 condivisioni 17 Views - "He said to them, But who do you say that I am? Peter answered and said to Him, You are the Christ."
Mark 8:29 ( NKJV)
*DAILY VERSE*
Check it out!:
Shared from https://lordsbook.com
download the app on
IOS
https://apps.apple.com/ug/app/lordsbook-app/id6670486435
ANDROID
https://play.google.com/store/apps/details?id=com.himfirstapps.lordsbookapp"He said to them, But who do you say that I am? Peter answered and said to Him, You are the Christ." Mark 8:29 ( NKJV) *DAILY VERSE* Check it out!: Shared from https://lordsbook.com download the app on IOS https://apps.apple.com/ug/app/lordsbook-app/id6670486435 ANDROID https://play.google.com/store/apps/details?id=com.himfirstapps.lordsbookappLORDSBOOK.COMWelcome to Lordsbook | Christian Social Media Platform - Faith...Lordsbook is a Christian social network with faith reels bible teachings that is designed to help you grow in faith daily through scripture devotionals Bible study and a powerful global community focused on Jesus.1 Commenti 0 condivisioni 37 Views2
-
-
More Posts